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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
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भूरी शाहीनां खळखळ
कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती सीडी काव्यसंग्रह |
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(गीत)
घन-'श्याम' ठक्कर
हम तो सनम! रहते है बीमार तेरे नामके,
लोग किया करते हैं इलाज पर जुकामके!!
मेरे हरेपनको... पाला पडा बदनामसे,
(कि) ना रहे हैं खेतके..., ना रहे हैं गामके.
नैन पर भी दिलकी लालिमाका रंग आ गया,
जैसे द्राक्षपे भी शराबी खुमार छा गया!
हमने दिलके जख्मको रखे है ऐसे थाम के,
जैसे शबरीने रखे हो बेर चखके रामके!
चेहरे पे पूनम सजा मैं आयी व्रज बनी-ठनी,
पेडके नीचे चुराई किसने मेरी चांदनी?
ना सूरज न चांद, हाल क्या है 'श्याम'-शाम के?
रोये मयको सब, कि टुकडे कौन गिने जामके?