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लाज ओढूं
तेरी नजरकी
तो सजन मेरी
चुनरीपे दो लग जाये नैन!
तू तो 'छूने पे उंगलीकी आरपार सरके' - वो फूल, मैं संभालुं तुझे कैसे?
मैं तो गुस्सेकी दुपहरमें सूरज निकालु, उसकी गर्मी भी चांदनी हो जैसे!
कांटोंमें फंस गै हो घाघरेकी कोर, ऐसे फंस जाये होठोंमें बैन!*
मेरी मटकीको प्यास लगे इतनी, कि श्याम! तेरी जमुनामें कितना है पानी?
जैसे मटकी के पानीको छ्न्ना पी जाय, ऐसी 'राधा की छेड' की कहानी
लाल-पीली 'चहचह'की गूंथके चटाई, मेंने उसमें बिठाया मेरा चैन
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* बैन = बोल
Oasis Thacker
गझल
Gazal
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Music: Oasis Thacker Instrumental Music |
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संगीतः घनश्याम ठक्कर |
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कवि घनश्याम ठक्कर |
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