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पोरा पै दे तुं (छैला पिलादे तू)
रीधमका एक अपूर्व प्रयोग
प्यारे दोस्तो
मैं कीबॉर्ड प्लेयर बननेके पहले रीधमीस्ट था, और संगीत नियोजक बननेके पहले रीधम नियोजक. अक्सर गीतमें श्रोता रीधम और रीधम संयोजनकी तरफ साइड-डीशकी तरह ध्यान देता है; लेकिन मेरी रायमे अच्छा रीधम संयोजन गीतमें चार चांद लगा देता है, उसका प्रमाण आपको इस गीतमें मिलेगा.
तन्हाईमे जब अनिद्रा दिलोदिमागके अंश अंश पर दंस देने लग जाती है, तव पंछीयोकी चहचहाहट भी तंग करती है. दिलमें तुफान उठता है. रंगीला और रंगीली, दोनोंको लगता है कि उनकी जवानी एकदम खाली बीती जा रही है. फिर तो पायल झनकती है, घाघरा घमकता है, छैला रूपकी प्याली पीनेको निकलता है, लेकिन रंगीली प्रीतकी प्यालीकी तलाशमें है. फिर मेलेमें सब सेटल हो जाता है, और सब हंसते-खेलते घर आ जाते हैं.
किशोर मनराजाको नामके हिसाबसे गुजराती लोकसंगीतके किशोरकुमार कह सकतें है, लेकिन उनकी आबाझ और गाने के नखरे महंमद रफी साबकी याद दिलाते है. उन्होंने बहुतसी गुजराती फिल्मोंमें गाया है, और प्रादेशिक फिल्मफेरके ऍवॉर्ड भी जीते हैं. जयश्री भोजविया भी दमयंती बरडाईकी तरह देहाती लडकी है, जीसकी आवाजमें ही नहीं, लहूकी हर बुंदमें लोकसंगीत बहता है. जयश्रीने भी गुजराती फिल्मोंमें गाने गाये हैं.
घनश्याम ठक्कर
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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
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भूरी शाहीनां खळखळ
कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती सीडी काव्यसंग्रह |

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पोरा पै दे तुं (छैला पिलादे तू) |
डांडियारास |
गीत - संगीतः घनश्याम ठक्कर :: स्वरः किशोर मनराजा, जयश्री भोजविया और साथी
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