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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती सीडी काव्यसंग्रह |
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Music * Poetry * Literature * Comedy * Entertainment * Performing Arts |
संगीत़़ * कविता * साहित्य * हास्य * मनोरंजन |
ये है मेरा वसीयतनामा(गझल)घनश्याम ठक्करअंधेरे के पूरे लश्कर को एक जुगनू ने ललकारा! हरेक गुल को कांटों का रक्षण देने का अपना नारा.
ये है मेरी अंतिम इच्छा, ये है मेरा वसीयतनामा: तोड दो इत्र की हरेक बोतल, बहने दो खुशबू की धारा...
हम को अपमानित करना हो तो घायल भी करना होगा, जब तुमने मारा तो हलकी आहों के पत्थर से मारा.
होली होगी चिता हमारी, गुलशन मेरा श्मशान होगा, 'ठक्कर' ना कहदेः 'घनश्याम' मरा था इस जगमें बेचारा.
देखो फिर मझधार के बीच में जा पहुंचा है एक किनारा, जीत गया 'घनश्याम' लो फिरसे, एक बार फिर 'ठक्कर' हारा. Posted by Ghanshyam Thakkar
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राधाकी व्यथा (गीत) - घनश्याम ठक्कर

पर-घर |
Computer-Art: Ghanshyam Thakkar |
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