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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
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कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
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भूरी शाहीनां खळखळ
कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती सीडी काव्यसंग्रह |
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जख्म दिल पर |
गझल |
घनश्याम ठक्कर |
जख्म दिल पर ऐसे नक्काशी हुआ,
प्रतिशब्द करदे भीत पर जैसे गढा!
मैं गीत तेरे देशमें अब गाउं क्या?
हर स्वर यहां तो तेज सुरसे कट गया!
मेरी हथेली कौन खुरचे रात-दिन,
कि भाग्य-रेखाका सतत नकशा नया?
आंखें तो कब की डूब गई मझधार पर,
नजरों का कन्दक शब किनारे पर गया.
बाकी तो अनबदला रहा सब चित्रमें,
बस एक चेहरा ही विपर्यय निकला!
हां, पहाड बनने की थी जिद 'घनश्याम' को,
सब ओर मेरे खाई कोई खन गया!
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Posted by Ghanshyam Thakkar
राधाकी व्यथा (गीत) - घनश्याम ठक्कर

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Computer-Art: Ghanshyam Thakkar